Thursday, 5 June 2014

जन जीवन तू संग है,
सबसे बड़ा जनसंघ है,
मानवता की है परिपाटी,

क्युकी मानवता तू धन्य है और मानवता ही धर्मं है
जन जीवन तू संग है,
सबसे बड़ा जनसंघ है,
मानवता की है परिपाटी,

क्युकी मानवता तू धन्य है और मानवता ही धर्मं है

Wednesday, 4 June 2014

भारतीय गरीबों का अँधा भविष्य
आज भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभर रहा है पर राजनैतिक विसंगतिया ऐसी फैली हुई है कि देश कि जनता न चाहते हुए भी इस उलझन में पड़ गयी है कि हमारा हित चाहने वाला कौन सा व्यक्ति निष्पक्ष और न्यायपूर्ण है क्यों समाज में व्याप्त इस स्वार्थपूर्ण कुरीतियों ने समाज में फैली इन कुरीतियों को और भी मजबूती प्रदान की है जिसे शायद कोई अगर दूर भी करना चाहे तो उन्हें बाधक  तत्वो का आये दिन सामना करना पड़ता है आज कि राजनैतिकता केवल और केवल एक वोट तक सीमित रह गयी है क्युकी जो व्यक्ति इससे ऊपर उठकर राजनीतिक सुधार करने कि कोशिश करता है या तो उनका हाल जय प्रकाश नारायण या भगत सिंह और ऐसे हजारों शहीद जिन्हे आज तक शहीद होने का दर्जा भी नहीं मिल सका उनके जैसा। कारण सिर्फ और सर्फ एक अड़ियल स्वभाव है जो कि उस व्यवस्था को कमजोर बना रहा है और व्यवस्था में स्वार्थ रुपी बीज को पेंड का रूप देने में लगा हुआ है। आज देश के गरीबों और असहाय लोगो के लिए जो भी योजनाएं लागू की जा रही हैं उनका फायदा केवल कुछ सीमित लोगों को ही मिल पा रहा है कारण या तो काला बाजारी है या फिर उन गरीबों के मुखियाओं में आपसी मतभेद। आज अगर मध्यप्रदेश कि बात कि जाए तो माननीय मुख्यमंत्रीजी धरने पे बैठ जरूर रहे हैं लेकिन जिनके लिए वो बैठ थे क्या उनका हक़ उन्हें मिल रहा है क्या उनके अधिकार का लाभ उन्हें मिल रहा है। आज प्रदेश में लागू अटल ज्योति अभियान का संचार कितनी शुद्धता से हो रहा है उसका आँखों देखा हाल मैंने तब देखा जब मै गाँव के घर घर भ्रमण करने निकला और मैंने वहाँ पाया कि बिजली तो दूर वह तक कभी बिजली का तार तक नहीं पंहुचा है।  गाँव में गरीबों के हक़ का अनाज उन्हें सुपुर्द करने के लिए जो प्रतिनिधी रखे गए हैं वो उस अनाज कि काला बाजारी कर अपना वित्तीय स्तर सुधार रहे हैं गाँव में सड़क के नाम पर गर्मियों में धूल और बारिश में कीचड़ मिलता है सड़के बनाने के लिए जिन्हे ठेके दिए जाते हैं वो वो काम को केवल और केवल मजाक समझ कर प्रदेश सरकार की खिल्ली उड़ा रहे है गाँव में सड़क न बनाने का एक और कारण सरपंचों और वहाँ के सचिवो में लाभ को लेकर आपसी मतभेद।  और न जाने कितनी ऐसी नाकामियां है जो जनता को केवल और केवल सरकार कीअव्यवस्थित नीतियों के कारण भुगतना पड़ रहा है।  कल माननीय मुख्यमंत्री जी जब धरने पर बैठे तब कोई बवाल नहीं हुआ क्यूंकी वो बीजेपी के थे इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्रीजी धरने पर बैठे तो कुछ नहीं हुआ क्युकी वो कांग्रेस के समर्थक थे और उससे पहले आँध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री धरने पे बैठे तो कुछ नहीं हुआ क्युकी वो खुद कांग्रेस के सदस्य थे और ये सभी धरने इसलिए हुए क्यूकी मूद्दे वो थे जो उनके हाँथ में नहीं थे बल्कि केंद्र सरकार के हाँथ में हैं ।  लेकिन मुझे आज भी वो दिन याद है जब दिल्ली के मुख्यमंत्री माननीय श्री अरविन्द केजरीवालजी धरने पे बैठे तो सभी पार्टियाँ सब काम छोड़कर उनकी बुराई में लग गयीं क्युकी वो केवल गरीब और असहाय जनता के मुद्दों के हित की बात करते हैं वो उस भारत कि बात करते है जिसका सपना स्वामीजी, बापू, और नेताजी जैसे देश के महापुरुषों ने देखा था जहा जनतांत्रिक हितों की बात हो व्यक्तिगत हित को नाकारा जाए। जनता में इस वार्तामान सरकार के खिलाफ जो असंतोष फैला है उसका चेहरा अगले विधानसभा चुनाव में परिवर्तित हो सकता है।  सरकार कुछ भी कहे लेकिन जो सच्चाई दिख रही है उसको झुठलाया नहीं जा सकता है गरीब जनता आज भी सरकार के द्वारा किये गए वादों को तरस रही है क्यूंकी वो वादे केवल वोट तक सीमित थे उम्मीद है की वर्तमान सरकार इन बातों को ध्यान दे और गम्भीरता से ले वरना अगले चुनाव में दिल्ली जैसा हाल होने में देर नहीं लगेगी।
                           धन्यवाद!

                                                                                         भारतीय सामान्य नागरिक
                                                           जयप्रकाश मिश्र