Saturday, 8 March 2014

ये वो महिलाएं हैं, जिनकी जिंदगी की डायरी में असंभव शब्द नहीं है। इन महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में जिद और जुनून के बूते एक मुकाम हासिल किया है। लोग इनके कार्यों को सराहते हैं, उनसे प्रेरणा लेते हैं।

 काम कोई भी हो; थोड़ी जिद कीजिए और पूरी ताकत लगा दीजिए, आपको कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। इन पांचों महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में यही साबित किया है। दिव्यंका टेलीविजन का लोकप्रिय नाम हैं। छोटे-छोटे इवेंट्स के जरिये एक बड़ा मुकाम हासिल करने वालीं दिव्यंका अभिनय में अपना करियर बनाने वालीं लड़कियों के लिए आदर्श हैं।

मध्या सेंटर फॉर रिसर्च एंड डेवलपमेंट की सर्वेसर्वा अपराजिता भोपाल की यंग बिजनेस वुमेन हैं। अपने बूते इन्होंने अपनी एडवरटाइजिंग एजेंसी को करोड़ों के टर्न ओवर तक पहुंचाया है।

लता मुंशी कथक की अंतरराष्ट्रीय नृत्यांगना हैं। इनकी सिर्फ यही पहचान नहीं है। इनके सान्निध्य में सैकड़ों बच्चे कथक सीखकर अपने माता-पिता का नाम रोशन कर रहे हैं।

राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू हुई निर्भया पेट्रोलिंग की सबसे पहले कमान पुलिस सब इंस्पेक्टर नमिता साहू को सौंपी गई थी। नमिता सिर्फ इसलिए चर्चित नहीं हैं कि वे अपनी स्टाइल के कारण गुंडे-बदमाशों के छक्के छुड़ा देती हैं, बल्कि उन्होंने अपने अब तक के करियर में कई ऐसे केस सॉल्व किए हैं, जिनमें महिलाओं की जिंदगी/इज्जत दांव पर लगी हुई थी।

क्षमा कुलश्रेष्ठ कला के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम है। चलने-फिरने में अक्षम क्षमा ने अपने भीतर के रंगों को समेटा और केनवास पर ऐसे रंग उतारे/सहेजे कि, आज उन्हें देशभर में सराहा जाता है।

इन महिलाओं के संदर्भ में इतना कह सकते हैं-
गर होता समंदर जो गहरा/ थाह न ले पाता कोई।
दूर होता चांद गर तो/जा न पाता वहां कोई।।
असंभव नहीं है कुछ भी/ बस थोड़ी आग दिल में चाहिए।
हो तनिक विश्वास मन में/ जोश खूं में चाहिए।

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